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Wednesday, January 21, 2009

खो खो

तनहा

देखीए तो लगता है
जिंदगी की राहों मै
एक भीड चलती है

सोचिए तो लगता है
भीड मे है सब तनहा

जितने भी ये रिश्ते है
काँच के खिलोने है
पल मे तूट सकते है... एक पल मे हो जाएं कोन जाने कब तनहा...

देखीए तो लगता है
जैसे ये जो दुनियॉं है
कितनी रंगी महफिल है
सोचिए तो लगता है कितना गम है दुनियाँ मे कितना जख्मी हर दिल है...

वो जो मुस्कुराते थे
जो किसीको ख्वाबों मे अपने पास पाते थे...
उनकी नींद तूटी है ओर है वो अब तनहा

देखीए तो लगता है
जिंदगी की राहों मै
एक भीड चलती है

सोचिए तो लगता है
भीड मे है सब तनहा

ह्याला कविता म्हणण उचित ठरणार नाही कारण फार काळापूर्वी "स्टार प्लस" वर "तनहा" ही एक वीकली सिरीयल लागायची त्याचच हे शीर्षक गीत! आणि दुसरी आहे ती गझल: रूप कुमार राठोड ह्यांची ऐसा कोई जिंदगी से वादा तो नही था...

ऐसा कोई जिंदगी से वादा तो नही था... तेरे बीना जिने का इरादा तो नहीं था (२)

तेरे लिए रातों मे चांद नी उगाई थी त्यारीयोंमें खुशबूकी रोशनी लगाई थी (२)
जाने क हॉ तूटी है डोर मेरे ख्वाब की ख्वाबसे जागेंगे सोचा तो नहीं था

ऐसा कोई जिंदगी से वादा तो नही था... तेरे बीना जिने का इरादा तो नहीं था (२)

श्यामियाने श्यामों के रोज ही स जाए थे कितनी उम्मीदोके मेहमाँ बुलाए थे(२)
आके दरवाजेसे लोट गए हो युभी कोई आएगा सोचा तो नहीं था

ऐसा कोई जिंदगी से वादा तो नही था... तेरे बीना जिने का इरादा तो नहीं था (२)

ह्याला कविता म्हणण उचित ठरणार नाही कारण फार काळापूर्वी "स्टार प्लस" व र "तनहा" ही एक वीकली सिरीयल लागायची त्याचच हे शीर्षक गी त! आणि दु स री आहे ती गझल: रूप कुमार राठोड ह्यांची ऐसा को ई जिंदगी से वादा तो नही था...
ऐसा को ई जिंदगी से वादा तो नही था... तेरे बीना जिने का इरादा तो नहीं था (२)

तेरे लिए रातों मे चांद नी उगाई थी त्यारीयोंमें खुशबूकी रोशनी लगाई थी (२)
जाने क हॉ तूटी है डोर मेरे ख्वाब की ख्वाबसे जागेंगे सोचा तो नहीं था

ऐसा को ई जिंदगी से वादा तो नही था... तेरे बीना जिने का इरादा तो नहीं था (२)

श्यामियाने श्यामों के रोज ही स जाए थे कितनी उम्मीदोके मेहमाँ बुलाए थे(२)
आके दरवाजेसे लोट गए हो युभी कोई आएगा सोचा तो नहीं था

ऐसा कोई जिंदगी से वादा तो नही था... तेरे बीना जिने का इरादा तो नहीं था (२)


त्या वेळेच्या ह्या दोन मला अतिशय आवडणा र्‍या गझल म्हणजे आता ही आवडतात पण उस वक्त की बात ही कुछ गजबकी है!
आता खो: माझा खो फिरून संवेद अन् प्रशांतला! :)


(मायबोली वरून हिंदी लिखाणाचा हा प्रयत्न केला आहे दुसरा फाँट नसल्याने शुद्धलेखनाच्या चुका असतील माफी असावी!